नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने साल 2014 के आम चुनावों में एक बड़ी जीत हासिल करते हुए केंद्र में सरकार बनाई थी.
अब सरकार अपना कार्यकाल पूरा कर रही है. नए चुनाव को लेकर सोमवार को बीजेपी अपना नया संकल्प पत्र भी जारी करने वाली है.
साल 2014 के बीजेपी के घोषणापत्र में किए गए वादे कितने पूरे हुए, कितने अधूरे हैं और उनकी क्या स्थिति है, बीबीसी ने इन्हीं सवालों की पड़ताल की है.
अब तक अधूरा: ऐसे वादे जिनको निभाने की दिशा में नई योजनाएं लाई गईं, ज़्यादा फंड मुहैया कराया गया और क़ानूनो में बदलाव किए गए. लेकिन इसके बावजूद इन पर अब भी काम जारी है.
कोई प्रगति नहीं: ऐसे वादे जिन पर सरकार ने कोई काम नहीं किया. इनमें वो वादे भी शामिल हैं जिनका सरकार ने मसौदा तो तैयार किया लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें रद्द कर दिया.
इस प्रक्रिया में हमने संसद में पूछे गए सवाल, आधिकारिक रिपोर्ट्स और सर्वेक्षणों का अध्ययन किया. ये आंकड़ें 1 मार्च, 2019 तक के हैं.
हमने बीजेपी के साल 2014 के घोषणापत्र में किए गए 393 वादों पर गौर किया लेकिन अपने विश्लेषण में केवल 346 वादों को ही शामिल किया.
कुछ वादे दोहराए गए थे और कुछ में विश्लेषण करने जैसा कुछ नहीं था. 346 में से अधिकतर वादे गवर्नेंस की श्रेणी किए गए थे.
1 मार्च, 2019 तक सरकार ने अपने 34% वादे पूरे किए. कृषि क्षेत्र में किए गए 17 में से सिर्फ़ पांच वादे ही पूरे किए गए.
कुल दस श्रेणियों में 'अर्थव्यवस्था ' के बारे सबसे अधिक वादे पूरे किए गए. इस श्रेणी में किए गए 19 में 11 वादे पूरे किए गए.
महिलाओं के बारे में किए गए 20 में से 11 वादे पूरे किए गए. अल्पसंख्यकों के बारे में घोषणापत्र में 12 वादे थे जिनमें से 6 पूरे किए गए.
अब सरकार अपना कार्यकाल पूरा कर रही है. नए चुनाव को लेकर सोमवार को बीजेपी अपना नया संकल्प पत्र भी जारी करने वाली है.
साल 2014 के बीजेपी के घोषणापत्र में किए गए वादे कितने पूरे हुए, कितने अधूरे हैं और उनकी क्या स्थिति है, बीबीसी ने इन्हीं सवालों की पड़ताल की है.
अब तक अधूरा: ऐसे वादे जिनको निभाने की दिशा में नई योजनाएं लाई गईं, ज़्यादा फंड मुहैया कराया गया और क़ानूनो में बदलाव किए गए. लेकिन इसके बावजूद इन पर अब भी काम जारी है.
कोई प्रगति नहीं: ऐसे वादे जिन पर सरकार ने कोई काम नहीं किया. इनमें वो वादे भी शामिल हैं जिनका सरकार ने मसौदा तो तैयार किया लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें रद्द कर दिया.
इस प्रक्रिया में हमने संसद में पूछे गए सवाल, आधिकारिक रिपोर्ट्स और सर्वेक्षणों का अध्ययन किया. ये आंकड़ें 1 मार्च, 2019 तक के हैं.
हमने बीजेपी के साल 2014 के घोषणापत्र में किए गए 393 वादों पर गौर किया लेकिन अपने विश्लेषण में केवल 346 वादों को ही शामिल किया.
कुछ वादे दोहराए गए थे और कुछ में विश्लेषण करने जैसा कुछ नहीं था. 346 में से अधिकतर वादे गवर्नेंस की श्रेणी किए गए थे.
1 मार्च, 2019 तक सरकार ने अपने 34% वादे पूरे किए. कृषि क्षेत्र में किए गए 17 में से सिर्फ़ पांच वादे ही पूरे किए गए.
कुल दस श्रेणियों में 'अर्थव्यवस्था ' के बारे सबसे अधिक वादे पूरे किए गए. इस श्रेणी में किए गए 19 में 11 वादे पूरे किए गए.
महिलाओं के बारे में किए गए 20 में से 11 वादे पूरे किए गए. अल्पसंख्यकों के बारे में घोषणापत्र में 12 वादे थे जिनमें से 6 पूरे किए गए.
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